नैतिक विकास शोध संस्थान सेवा ट्रस्ट प्रयाग के केंद्रीय कार्यालय शेरडीह झूँसी पर विगत 6 जुलाई से सावन महोत्सव के अवसर पर जारी अनन्त पार्थिव शिवलिंग निर्माण महायज्ञ आज 18वें दिन भी विश्व जनकल्याण एवं कोरोना महामारी के विनाश हेतु भागीरथ तपस्या के रूप में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अनवरत जारी रहा. जहाँ पर भक्तों ने भगवान भोलेनाथ का चन्दन से अभिषेक करते हुए सर्व मनोकामना पूर्ति का वरदान माँगा. यज्ञ स्थल पर महाशिवपुराण कथा का अमृतपान कराते हुए यज्ञाचार्य पं0 पवन देव जी महाराज ने कहा कि भगवान शिव अन्य सभी देवताओं की अपेक्षा अधिक सरल और कृपालु हैं. उन्होंने एक कथा का दृष्टांत देते हुए कहा कि सावन मास में पार्थिव शिवलिंग बनाकर चंदन से अभिषेक करने पर मनुष्य के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं उन्होंने कहा कि चंदन शीतल होता है इसलिए वह अपने शरीर में चंदन का भी लेप करते हैं. एक बार समुद्र मंथन के समय जब कालकूट विष निकला तो देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने उस हलाहल विष को पीकर तीनों लोंको को विष की ज्वाला से दग्ध होने से बचा लिया किंतु विष की गर्मी से उनका गला जला जा रहा था, उस समय देवताओं के कहने पर उन्होंने मष्तक सहित पूरे शरीर पर चंदन का लेप किया जिससे उन्हें विष की उष्णता से काफी राहत मिली. इसलिए चंदन से अभिषेक भगवान शिव को अधिक प्रिय है, अतः भक्तों को भगवान शिव का चन्दन से अभिषेक करना चाहिए जिससे उनका शरीर शीतल और क्रोध मुक्त रहता है.आज अभिषेक करने वालों में मुख्य रूप से नेशनल हॉकर फेडरेशन के प्रदेश महामंत्री रवि शंकर द्विवेदी के अलावा अधिवक्ता श्री प्रमोद भारतीया एवं श्री गौरव द्विवेदी (राष्ट्रीय सचिव राष्ट्रीय सनातन सेना), अरुण मिश्रा, ओपी सिंह सहित संस्था के संरक्षक फूलचन्द्र दुबे, नागेंद्र सिंह, राजनाथ तिवारी, संजय बनकटा, राजेन्द्र तिवारी दुकानजी, डॉ विजय सिंह, मधुचकहा, सत्य प्रकाश पाण्डेय एवं यज्ञ संयोजक श्याम सूरत पाण्डेय मुख्य रूप से उपस्थित रहे. यज्ञ अनवरत जारी रहेगा