कोलकाता । बीसीसीआई अध्यक्ष और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कप्तान सौरभ गांगुली बुधवार को 48 साल के हो गये। 'प्रिंस ऑफ कोलकाता' और 'रॉयल बंगाल टाइगर' के नाम से लोकप्रिय गांगुली को भारतीय क्रिकेट में आक्रमकता लाने वाला कप्तान माना जाता है। भारतीय क्रिकेट के रवैये में आये बदलाव का श्रेय भी गांगुली को जाता है। भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दिलाने में गांगुली की अहम भूमिका है। गांगुली ने साल 1996 में लॉर्ड्स के मैदान पर 131 रनों की शानदार पारी के साथ टेस्ट पदार्पण किया था। 113 टेस्ट मैचों में गांगुली ने 7212 और 311 एकदिवसीय मैचा में  11363 रन बनाए। भारत की ओर से विश्व कप में सबसे ज्यादा 183 रनों का रिकार्ड भी उनके नाम है। गांगुली ने एकदिवसीय में कुल 22 शतक लगाए, जिसमें से 18 शतक उन्होंने विदेशी मैदानों पर लगाये। कप्तानी की बात करें तो विदेशी धरती पर उनकी कप्तानी में भारत ने 28 टेस्ट मैच खेले, जिसमें से 11 में भारतीय टीम को जीत मिली। 
​गांगुली ने उस समय भारतीय टीम को संभाला जब साल 2000 में मैच फिक्सिंग प्रकरण के बाद क्रिकेट कठिन दौर में था। उस समय गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम एकजुट नजर आयी। उसके कप्तान बनते समय भारतीय टीम विश्व रैंकिंग में आठवें पायदान पर थी और जब उन्होंने संन्यास लिया तब टीम दूसरे नंबर पर पहुंच गयी। गांगुली ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी के बाद सन 2007 में पाकिस्तान के खिलाफ 239 रन बनाए। बेंगलुरु में खेली गई यह पारी उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का एकमात्र दोहरा शतका है। 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नागपुर में उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला। 2000 में केन्या में खेला गया आईसीसी नॉकआउट कप गांगुली की कप्तानी में पहला बड़ा टूर्नामेंट था। साल 2002 में भारत ने श्रीलंका में आयोजित आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का संयुक्त खिताब जीतकर गांगुली की कप्तानी में पहला आईसीसी खिताब जीता।
2002 के नेटवेस्ट कप के रोमांचक फाइनल में भारतीय टीम ने 146 रनों पर पांच विकेट खोने के बाद इंग्लैंड को रहा दिया। इस दौरान भारतीय टीम ने 325 के स्कोर को पार कर दिया। भारत की इस जीत में तब मोहम्मद कैफ और युवराज सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस समय गांगुली का लॉर्ड्स की बालकनी में शर्ट उतारकर लहराना सभी को याद है। 2003 में गांगुली की कप्तानी में ही भारतीय टीम क्रिकेट विश्व कप के फाइनल में पहुंची थी हालांकि फाइनल में भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा।