राम मंदिर निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से तस्वीर साफ हुई, तो तैयारियों ने भी जोर पकड़ लिया।  मंदिर के लिए 1990 के दशक से राम जन्मभूमि न्यास की कार्यशाला में तराश कर रखे गए पत्थरों की भी तकदीर बदल गई और इनकी साफ-सफाई का काम शुरू हुआ।  तराशे गए पत्थरों की साफ-सफाई के लिए दिल्ली की कंपनी केएलए कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को ठेका दिया गया है। 
जानकारी के मुताबिक पत्थरों की साफ-सफाई के साथ ही पत्थरों को तराशने का काम भी चल रहा है।  पत्थर तराशने के काम की निगरानी कर रहे अन्नू भाई सोनपुरा ने बताया कि एक मंजिल के लिए पत्थर तराशने का काम पूरा हो गया है।  इसे राम जन्मभूमि परिसर में सफाई के बाद पहुंचा दिया जाएगा।  उन्होंने कहा कि दूसरी मंजिल के लिए पत्थर तराशने का काम वहीं होगा। वहीं, पत्थरों की साफ-सफाई का कार्य कर रही कंपनी के निदेशक संदीप गर्ग ने कहा कि हम स्वदेश केमिकल से पत्थरों की सफाई कर रहे हैं।  इसके जो परिणाम हैं, उनकी गुणवत्ता विदेशी केमिकल के इस्तेमाल के मुकाबले 10 गुना बेहतर है।  उन्होंने बताया कि पुराने भवनों के रिहैबिलिटेशन में कंपनी की विशेषज्ञता है।  गर्ग ने बताया कि दो दर्जन से अधिक प्रशिक्षित कर्मचारी पत्थरों की सफाई में जुटे हैं। वहीं, दूसरी तरफ श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए स्वायल टेस्टिंग और समतलीकरण का काम भी चल रहा है।  स्वायल टेस्टिंग और मंदिर की बुनियाद का स्ट्रक्चर तैयार करने का काम एलएनटी कर रही है।  बुनियाद का स्ट्रक्चर तैयार होने के बाद सबसे पहले पत्थरों की आवश्यकता होगी, इसीलिए तराशे गए पत्थरों की साफ-सफाई के लिए ठेका दिया गया है। बताया जाता है कि कई कंपनियों ने ट्रस्ट को अपना डेमो दिया था।  ट्रस्ट ने सभी के डेमो देखने के बाद दिल्ली की कंपनी केएलए को पत्थरों की सफाई का टेंडर दिया।  कंपनी से जुड़े सूत्रों की मानें तो 3 से 4 महीने में पत्थरों की सफाई का कार्य पूरा कर लिया जाएगा।