भोपाल । 2018 में कांग्रेस जिस किसान कर्जमाफी के वादे के साथ सत्ता में आई थी, वही अब भाजपा की गले की हड्डी बन गई है। दरअसल, सूत्रों का कहना है कि आर्थिक बदहाली के कारण भाजपा सरकार इस बार बजट से किसान कर्जमाफी योजना को बाहर करने की तैयारी कर रही है, लेकिन पार्टी  के रणनीतिकारों का कहना है कि अगर ऐसा होगा तो उसका असर उपचुनाव पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार के सामने एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई वाली स्थिति बन गई है।
गौरतलब है कि अभी तक भाजपा कांग्रेस की किसान कर्जमाफी पर सवाल उठाती रही है। लेकिन मानसून सत्र में पेश किए जाने वाले बजट में सरकार के सामने कर्जमाफी का मुद्दा बड़ी समस्या बन गया है। मानसून सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले शेष अवधि के आम बजट की अब तक की  तैयारियों में इसे स्थान नहीं दिया गया है। यही नहीं जिन योजनाओं के लिए बजट प्रावधान किया जाना है उनको लेकर विभिन्न विभागों के साथ वित्त विभाग द्वारा माथापच्ची की जा रही है , लेकिन उसमें अब तक किसान कर्ज माफी योजना का नाम तक नहीं आया है। इससे माना जा रहा है कि अब भाजपा सरकार इससे किनारा करने का मन बना चुकी है। यही नहीं अब तक बजट की कवायद में नाथ सरकार की दूसरी महत्वपूर्ण योजना इंदिरा ज्योति योजना को भी दूर रखा गया है।


11 लाख किसानों को कर्जमाफी का इंतजार
गौरतलब है कि प्रदेश के करीब 11 लाख किसानों को इस योजना के तहत कर्ज माफी का इंतजार है। इसमें छह लाख किसान वे भी शामिल हैं जिनकी कर्जमाफी की प्रक्रिया पूर्व की नाथ सरकार ने फरवरी में शुरू की थी, लेकिन इसके तत्काल बाद ही प्रदेश की सत्ता से नाथ सरकार को बाहर होना पड़ा। उल्लेखनीय है कि भाजपा सरकार में कूषि मंत्री कमल पटेल पहले ही साफ कर चुके हैं कि किसान कर्जमाफी कांग्रेस का वादा है, भाजपा ने ऐसा कोई वादा ही नहीं किया था। इससे स्पष्ट है कि यह योजना अब बंद होना तय है।


इंदिरा ज्योति योजना में बदलाव तय
बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए नाथ सरकार द्वारा शुरु की 100 यृूनिट तक 100 रुपए बिजली बिल वाली इंदिरा ज्योति योजना को भी शिव सरकार विराम देने जा रही है। यही वजह है कि अब तक इसे बजट प्रावधान में जगह नही मिल सकी है। माना जा रहा है कि इस योजना को संबल से जोड़ा जा सकता है। इसके तहत संबल की पात्रता वाले मजदूर और गरीबों को ही फायदा दिया जाएगा।


कोरोना की दिखेगी बजट पर छाया
राज्य सरकार के बजट पर इस बार कोरोना की छाया दिखना तय है। इस साल बजट में आम सालों की तुलना में कम वृद्वि होने का अनुमान है। प्राय: हर साल के बजट में 15 फीसदी तक की वृद्वि होती है, लेकिन इस बार उसमें 5 से 10 फीसदी तक की ही वृद्वि होने का अनुमान है। इसकी वजह मानी जा रही है बीते तीन माह में राजस्व वसूली पूरी तरह से ठप हो जाना। इसी तरह से माना जा रहा है कि कोरोना के चलते नए बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्थव्यवस्था को गति देने वाली योजनाओं पर ही रहने वाला है। जिससे नई योजनाओं को भी बजट में जगह नहीं मिलेगी।