हर साल सीता नवमी का पर्व बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है. ऐसे में कल यानी 2 मई को सीता नवमी है और इस पर्व को जानकी नवमी भी कहा जाता है. हिन्दू धार्मिक आस्था के अनुसार यह महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है और इस दिन माता सीता सहित भगवान राम की पूजा कर उपवास रखा जाता है. तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं माता सीता की कितनी बहने थी और कैसा था उनका जीवन.

आप सभी जानते ही हैं कि मां सीता हमेशा ही अपने त्याग और बलिदान के लिए पहचानी जाती रहीं हैं और राजा जनक की बेटी और मिथिला की राजकुमारी ने अपने जिंदगी में कई कुष्ट झेले मगर कभी अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटी. ऐसे में कल यानी 2 मई को माता सीता की नवमी मनाई जाने वाली है. आपको बता दें कि ऐसी मान्यता है कि इस दिन मां सीता ने जन्म लिया था. वहीं माता सीता अपने त्याग और बलिदान के लिए जानी जाती हैं और त्रेता युग में सीता मां का विवाह अयोध्या के राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र भगवान श्री राम से हुआ था. आप सभी को बता दें कि शादी के बाद ही माता सीता को भगवान राम के साथ 14 वर्ष के वनवास के लिए जाना पड़ा था. ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं मिथिला की देवी राजा जनक की ज्येष्ठ पुत्री सीता के तीन बहने और थीं और उनका जिक्र भी वाल्मीकि रामायण में मिलता है. जी दरअसल वाल्मीकि रामायण के अनुसार मां सीता की एक बहन हैं उर्मिला, दूसरी मांडवी और तीसरी श्रुतकीर्ति थी जो राजा जनक के छोटे भाई कुशध्वज की बेटियां थीं.

उर्मिला - वाल्मीकि रामायण के अनुसार, उर्मिला, माता सीता की छोटी बहन थीं और सीता का विवाह जहां राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र राम से हुई थी तो वहीं उर्मिला का ब्याह राम के छोटे भाई लक्ष्मण से हो गया था.


मांडवी - सीता माता की बहन मांडवी, दशरथ पुत्र भरत से ब्याही थीं और मांडवी राजा जनक के छोटे भाई कुशध्वज की बेटी थीं. अगर लोक कथाओं को माने तो मांडवी साध्वी के रूप में रहती थीं. कहा जाता है कि भरत, अयोध्या में नहीं बल्कि नंदीग्राम में रहते थे.और मांडवी पति के भाई के प्रति समर्पण का पूरा सम्मान करती थीं.

श्रुतकीर्ति - श्रुतकीर्ति भी राजा जनक के छोटे भाई की बेटी थीं और इनका विवाह भगवान राम के छोटे भाई शत्रुघ्न से हुआ था लेकिन श्रुतकीर्ती का रामायण में ज्यादा जिक्र नहीं मिलता. लेकिन कहा जाता है कि शत्रुघ्न और श्रुतकीर्ति के दो पुत्र हुए. जिनके नाम थे शत्रुघति और सुबाहु.