मुम्बई । बाजार नियामक संस्था (सेबी) ने सोमवार को प्रतिनिधि सलाहकारों (प्रॉक्सी एडवाइजर) के लिये प्रक्रियात्मक दिशानिर्देश जारी किये हैं। इसके तहत प्रतिनिधि सलाहकारों को मतदान की सिफारिश करने के संदर्भ में नीतियां बनानी होगी और उसमें किसी प्रकार की नई व्यवस्था के बारे में अपने ग्राहकों को भी जानकारी देनी होगी। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपने एक परिपत्र में कहा कि नये दिशानिर्देश एक सितंबर से अमल में आएंगे। सेबी ने कहा, ‘‘प्रतिनिधि सलाहकार मतदान की सिफारिश के बारे में नीतियां बनाएंगे और उसमें कुछ भी नया जोड़ा जाता है, उसके बारे में अपने ग्राहकों को जानकारी देंगे। प्रतिनिधि सलाहाकर यह भी तय करेंगे कि नीतियों की साल में एक बार समीक्षा हो।’’ इसमें कहा गया है कि सिफारिश की गयी नीतियों में यह भी खुलासा होना चाहिए कि किन हालातों में मतदान सिफारिश उपलब्ध नहीं करायी जाएगी। इसके साथ ही इन सलाहकारों को अपने अनुसंधान और ग्राहकों को की गयी सिफारिशों के लिये अपनाये गये तौर-तरीकों और प्रक्रियाओं का भी खुलासा करना होगा। 
इसके साथ ही प्रतिनिधि सलाहकार किसी भी प्रकार की तथ्य संबंधी गड़बड़ी या सामग्री में समीक्षा के बारे में 24 घंटे के भीतर अपने ग्राहकों को जानकारी देंगे। सेबी के अनुसार उन्हें अपने ग्राहकों और कंपनी को प्रक्रियाओं के बारे में बताना होगा। साथ ही उन्हें अपने ग्राहकों और कंपनी के साथ रिपोर्ट भी साझी करनी होगी। प्रतिनिधि सलाहकार को इस बारे में अपनी वेबसाइट पर जानकारी देनी होगी। सेबी ने कहा कि कंपनी से टिप्पणी प्राप्त करने को लेकर समयसीमा को प्रतिनिधि सलाहकार परिभाषित कर सकते हैं। निश्चित समयसीमा के भीतर कंपनी की तरफ से जो भी टिप्पणियां या स्पष्टीकरण आएंगी, उसे रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। वहीं इसमें कहा गया है कि अगर कंपनी के विचार रिपोर्ट की सिफारिशों से अलग है, तब प्रतिनिधि सलाहकारों को उन विचारों पर गौर करते हुए परिशिष्ट रिपोर्ट में सिफारिशों को संशोधित करना होगा।