शनि देव के क्रोध से पूरी दुनिया कांपती है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए ना जाने क्या-क्या तरकीब अपनाते हैं। क्या आप जानते हैं कि शनि को न्याय का देवता भी कहा जाता है, क्योंकि वह हर व्यक्ति के कर्मो के हिसाब से ही फल प्रदान करते हैं। इसलिए गलत काम करने वालों पर शनि देव की हमेशा टेढ़ी नज़र रहती है और सच्चे इंसान के साथ वह हमेशा अच्छा करते हैं और अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं।भगवान शनि देव का जन्मोत्सव हर साल हिंदू पंचांग के ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन सच्चे भाव के साथ मनाया जाता है। इस बार यानी कि 2020 में शनि जयंती 22 मई को मनाया जाएगा । यह सत्य है कि भगवान शनि देव की कृपा जिस इंसान पर पड़ती है वह व्यक्ति रंक से राजा बन जाता है। ध्यान रहें कि जिन लोगों पर साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि दोष चढ़ा होता है, उनके लिए शनि अमावस्या का महत्व बहुत खास होता है। बात अगर ज्योतिष की करें तो शनि देव बहुत ही धीमी गति से चलते हैं. वह एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करने के लिए पूरे ढाई साल का वक्त लेते हैं और इनकी महादशा 19 वर्षों की होती है। शनि जयंती के दिन ज़रूर भगवान शनि की पूजा करें व साथ ही अपनी क्षमता के अनुसार दान भी दें।

 

शनि देव कौन है -

शनि देव को सभी नौ ग्रहों में प्रमुख ग्रह माना जाता हैं। बता दें कि शनि देव जो थे वह सूर्य और छाया के पुत्र हैं और इनका जन्म ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन ही हुआ था। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी ग्रहों में शनि की विशेष भूमिका होती है। अगर आपकी कुंडली में शनि शुभ भाव में रहें तो व्यक्ति को सब कुछ बड़ी आसानी से प्राप्त हो जाता है, लेकिन अगर शनि अशुभ भाव में रहता है तो व्यक्ति तमाम तरह की परेशानियों और बीमारियों से घिर जाता है।

 

शनि देव की पूजा से क्या हैं लाभ -

ऐसी मान्यता है कि भगवान शनि की पूजा करने से शनि की कुदृष्टि व्यक्ति पर कभी नहीं पड़ती है। शनि देव को कर्म फल का दाता भी कहा जाता है। याद रहे कि शनि देव कर्म के अनुसार ही किसी भी व्यक्ति को फल देते हैं। शनि देव की पूजा के लिए शनिवार का दिन, शनि जयंती और अमावस्या पर अवश्य से पूजा करनी चाहिए, क्योंकि इससे आपको विशेष फल की प्राप्ति हो सकती है।दूसरी ओर, हमारी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार और शनिवार संकटमोचन हनुमान जी का दिन माना जाता है। अगर आप पर भी शनि देव की बुरी दशा चल रही है तो हनुमान जी की पूजा करना आरंभ कर दें। कहत हैं कि हनुमान जी की पूजा करने से सभी तरह के दुष्प्रभाव दूर हो जाते हैं और जीवन में सब कुछ पहले से बेहतर हो जाता है।

 

शनि जयंती की पूजा विधि -

• सबसे पहले शनि जयंती के दिन सुबह स्नान कर लें और फिर शनि मंदिर जाकर याद से तेल अर्पित करें।

• साथ ही शनि जयंती पर गरीबों को दान अपनी क्षमता के अनुसार ज़रूर करें।

• भगवान शनि देव के इस तंत्रोक्त मंत्र - ओम प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम: या फिर ओम शं शनैश्चराय नम: मंत्रों का जाप अवश्य से करें।

• तिल का तेल, काले तिल, काले उड़द या फिर लौहे की कोई वस्तु दान करना ना भूलें।

• शनि देव से जुड़े दोष दूर करने या फिर उनकी कृपा पाने के लिए भगवान शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय मानी जाती है। रोजाना नियम के अनुसार शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करें क्योंकि इससे शनि देव के प्रकोप का भय दूर हो जाता है और साथ ही सभी बाधाएं भी कोसो दूर हो जाती हैं।

• बताते चलें कि अपनी कुंडली में शनि से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए शनिवार या शनि जयंती के दिन सुंदरकांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंदिर में जाकर अपनी क्षमता के अनुसार कुछ मीठा प्रसाद भी याद से चढ़ाएं।