कानपुर। एनकाउंटर में मारे गए मोस्ट वांटेंड विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे ने कहा कि कोई भी पैदा होते ही अपराधी नहीं होता। विकास भी अपराधी नहीं था। उसे क्षेत्र के लोगों ने अपराधी बनाया। गुरुवार रात न्यूज चैनल आजतक ने बातचीत में ऋचा ने कहा कि जब विकास दुर्घटना का शिकार हुआ था तो उसके दिमाग में बबल आ गया था। इसके कारण वह एनजाइटी का मरीज हो गया था। उसका इलाज चल रहा था। बीते 3-4 माह से इलाज नहीं हो सका था। इस बीमारी के कारण विकास का गुस्सा बहुत बढ़ गया था। 

बदमाश की औलाद बदमाश नहीं होती 
ऋचा ने कहा कि घटना के बाद से छोटा बेटा दिमागी तौर पर शॉक्ड हो गया है। हालांकि मैं अपने बच्चों की अच्छी परवरिश कर रही हूं। मेरे बड़े बेटे ने मेडिकल की तीन साल की पढ़ाई पूरी कर ली है। छोटे बेटे के हाईस्कूल में 91.4 प्रतिशत आए हैं। वे अपने रास्ते आगे बढ़ रहे हैं। ऋचा ने कहा कि वह सिर्फ इतना मैसेज देना चाहती है कि बदमाश की औलाद बदमाश ही नहीं होती। 

किस्मत अच्छी थी जो बचता रहा
पत्नी ने कहा कि विकास की किस्मत अच्छी थी जो वह अपराध करने के बाद भी बचता रहा। उसने कहा कि पुलिस ने कोई गलत कृत्य नहीं किया। मैं सिर्फ इतना चाहती की मेरे समाज के लोग मुझे समझें और बच्चों और मुझे माफ कर दें। एनकाउंटर पर सवाल खड़े होने की बात पर वह बोली कि मुझे न्यायपालिका पर भरोसा है। जो होगा ठीक ही होगा। उसने कहा कि मुख्यमंत्री से सिर्फ इतना ही कहूंगी कि विकास के कृत्यों की सजा मुझे और मेरे बच्चों को न दी जाए।

विकास के बारे में बहुत कुछ नहीं जानती थी
ऋचा ने कहा कि विकास के किस पुलिस अधिकारी, अफसर या राजनेताओं से संबंध थे इसके बारे में वह नहीं जानती। उसने कहा कि उसका गांव में आना जाना बहुत कम रहता था। उस पर जब गांव आने का दवाब बनाया जाता था, तब वह पहुंचती थी। विकास की ऐसी बहुत सी बातें हैं जिनके बारे में वह नहीं जानती। उसने कहा कि हमारे बीच संबंध सिर्फ इतने थे कि विकास अपने बच्चों की परवरिश के लिए पैसे देते थे और मैं सिर्फ बच्चों के लिए जी रही थी। 

जय से एक बार की मुलाकात 
ऋचा ने कहा कि वह जय बाजपेई को भी अच्छे से नहीं जानती। जिला पंचायत चुनाव में एक बार जय गांव आया था। उसी दौरान ऋचा की उससे पहली मुलाकात हुई थी। उसके बाद से कोई मुलाकात नहीं हुई। 

करोड़ों की सम्पत्ति नहीं 
ऋचा ने कहा कि विकास के पास करोड़ों की सम्पत्ति नहीं थी। अगर होती तो लखनऊ में 1600 वर्ग फुट के घर में नहीं रहना पड़ता। उसने कहा कि विकास जिंदा होते तो वह अपने कनेक्शन के साथ ही पैसों का स्रोत बता सकते थे। उसने कहा कि भैरोघाट से निकलते वक्त एक एक पुलिसकर्मी के हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए निवेदन किया था कि उत्तर प्रदेश ही क्या भारत वर्ष में विकास पैदा न हो।