सावन के माह शुरू होने को है, कुछ ही घंटों में महादेव का सबसे प्रिय माह का आगज़ होने वाला है। जहां एक तरफ़ शिव भक्तों ने इसकी तैयारियों शुुरु कर दी, तो वहीं सावन की शुरूआत में भोलेनाथ के भक्तों को अमरनाथ गुफा के लाइफ दर्शन करने का मौका मिला। कथाओं के अनुसार श्रावण के इस महीने में भोलेनाथ की पूजा से हर तरह की मनोकामना पूरी होती है। मगर इस दौरान इस बात का ध्यान रहे कि इनकी पूजा की विधि सही होनी चाहिए। वरना कहा जाता है जितनी जल्दी भोलेनाथ अपने भक्तों पर प्रसन्न होते हैं उतनी ही शीघ्र वो किसी भारी भूल करने से रुष्ट भी हो जाते हैं। तो अगर आप भोलेनाथ को रुष्ट नहीं, प्रसन्न करना चाहते हैंतो आगे जानें श्रावण के माह में किसी विधि से इनकी पूजा करनी चाहिए। साथ ही जानें इनके व्रत कथा, मुहूर्त तथा मंत्र।

व्रत विधि: जो भी जातक श्रावण माह के सोमवार को व्रत करते हैं, उन्हें महादेव के साथ-साथ देवी पार्वती की भी पूजा करनी चाहिए। साथ ही शिवलिंग को जल अर्पित करें। चाहिए। प्रत्येक व्रती को कोशि करनी चाहिए कि रात्रि में नीचे आसन बिछा कर सोना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में पहले सोमवार से लेकर 9 या फिर 16 सोमवार तक लगातार व्रत रख जा सकता है। अगर ऐसा संभव नहीं है तो सिर्फ सावन में आने वाले सोमवार के भी व्रत रख सकते हैं। ध्यान रहे शिव पूजा में उपयोग होने वाली सामग्री में शिव जी प्रिय वस्तुएं भांग, धतूरा आदि ज़रूर शामिल करें। इसके साथ ही भगवान शंकर की पूजा में गंगा जल का इस्तेमाल करना अनिवार्य होता है। इनकी पूजा के समय पूरे परिवार अर्थात शिवलिंग, माता पार्वती, कार्तिकेय जी, गणेश जी और उनके वाहन नन्दी की संयुक्त रूप से पूजा भी अति आवश्यक होती है। इनकी पूजा में लगने वाली सामग्री में जल, दूध, दही, चीनी, घी, शहद, पंचामृत, कलावा, वस्त्र, जनेऊ, चन्दन, रोली, चावल, फूल, बिल्वपत्र, दूर्वा, फल, विजिया, आक, धूतूरा, कमल−गट्टा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, पंचमेवा, भांग, धूप, दीप होना ज़रूरी होता। वरना पूजा का फल नहीं मिलता।
इसके अलावा निम्न मंत्र से इनका जप करना बहुत लाभकारी माना जाता है-

भगवान शिव के मंत्र
नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:॥
मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय
मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे म काराय नम: शिवाय:॥
शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय
श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय:॥
अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्।
अकालमृत्यो: परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम्।।
शिव मूल मंत्र- ॐ नमः शिवाय
महामृत्युंजय मंत्र ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनानत् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥