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84 महादेव आलेख श्रृंखला: अठारहवाँ महादेव : श्री कलकलेश्वर महादेव

  • जब घर में कलह हो, तो स्मरण करें कलकलेश्वर को
  • जहाँ टूटते रिश्ते पाते हैं नई ऊर्जा, और बिखरते संस्कारों को मिलता है संबल

डॉ. नवीन आनंद जोशी

कलह से मुक्ति का दिव्य केंद्र आधुनिक युग में जब पारिवारिक कलह, वैवाहिक तनाव और दांपत्य विवाद समाज की सामान्य सच्चाई बनते जा रहे हैं, ऐसे समय में उज्जयिनी की पावन भूमि पर विराजमान श्री कलकलेश्वर महादेव आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आशा, शांति और समाधान का दिव्य केंद्र बने हुए हैं।
यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि संस्कारों की पुनर्स्थापना और संबंधों के पुनर्जनन का आध्यात्मिक स्थल है।
उज्जैन की प्रसिद्ध चौरासी महादेवों की पावन श्रृंखला में अठारहवें क्रम पर विराजमान श्री कलकलेश्वर महादेव का मंदिर गोपाल मंदिर के समीप, मोदी की गली में, अग्रवाल धर्मशाला के सामने स्थित है।
यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आज के अशांत पारिवारिक जीवन में सौहार्द और संतुलन का आध्यात्मिक समाधान भी प्रस्तुत करता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक समय माता पार्वती मातृकाओं के साथ विराजमान थीं। तभी भगवान शंकर ने उन्हें अपने समीप आने को कहा और बोले—“हे महाकाली! मेरे गौर शरीर के पास बैठने से तुम्हारी शोभा बिजली के समान प्रकाशित होगी। मैंने श्वेत वस्त्र और श्वेत चंदन धारण किया है। तुम रात्रि के समान श्यामवर्णा हो, मेरे पास बैठोगी तो मुझे दृष्टिदोष नहीं लगेगा।”
भगवान शिव के ये शब्द माता पार्वती के हृदय को आहत कर गए। क्रोध में उन्होंने उत्तर दिया
“जब आपने नारद मुनि को मेरे पिता के पास विवाह प्रस्ताव के लिए भेजा था, तब क्या आपने मेरा रूप नहीं देखा था? तब तो मेरा रंग आपको स्वीकार था!”
यह विवाद इतना उग्र हो गया कि तीनों लोकों में संकट उत्पन्न हो गया। पंचतत्व—अग्नि, वायु, जल, आकाश और पृथ्वी—असंतुलित होने लगे। प्राकृतिक आपदाएँ फैलने लगीं। देवता, गंधर्व, यक्ष और ऋषि भयभीत हो उठे। संपूर्ण सृष्टि में कोलाहल और अशांति व्याप्त हो गई।
दिव्य ज्योतिर्लिंग का प्राकट्य
उसी क्षण पृथ्वी को भेदकर एक दिव्य ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ। उस लिंग से आकाशवाणी हुई—
“इस लिंग का पूजन करो। यह समस्त कलह और क्लेश को शांत करेगा।”
देवताओं ने विधिवत पूजन किया। पूजन के प्रभाव से माता पार्वती का क्रोध शांत हुआ और तीनों लोकों में पुनः शांति की स्थापना हुई। तभी देवताओं ने उस लिंग को नाम दिया—
“श्री कलकलेश्वर महादेव”
अर्थात् वह महादेव जो कलह और क्लेश का नाश करते हैं।
आज के समय में, जब पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों पर विवाद, बढ़ते तलाक, टूटते परिवार और अशांत वातावरण आम हो चला है—श्री कलकलेश्वर महादेव की आराधना और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है।
निरंतर कलह न केवल दांपत्य जीवन को नर्क बना देती है, बल्कि इसका गहरा प्रभाव बच्चों के कोमल मन पर पड़ता है। अशांत वातावरण में पले बच्चे संस्कारों से दूर हो जाते हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए घातक सिद्ध होता है।
मान्यता है कि जो दंपत्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ श्री कलकलेश्वर महादेव के दर्शन और पूजन करते हैं—उनके घर से कलह स्वतः दूर होती है
दांपत्य जीवन में सामंजस्य और प्रेम बढ़ता है ,गृह शांति की स्थापना होती है।यह भी विश्वास है कि यहाँ अभिषेक करने से व्याधि (रोग), सर्पभय और अग्निभय से मुक्ति मिलती है। पारिवारिक जीवन में संस्कार, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।यद्यपि श्री कलकलेश्वर महादेव के दर्शन वर्षभर किए जा सकते हैं, किंतु—श्रावण मास,चतुर्दशी तिथि इन दिनों यहाँ दर्शन-पूजन का विशेष महत्व माना गया है। इन अवसरों पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है और वातावरण शिवमय हो उठता है।
श्री कलकलेश्वर महादेव केवल एक देवस्थान नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों को जोड़ने, बिखरते संस्कारों को संवारने और अशांत जीवन को संतुलन देने वाले शिवतत्व हैं।
जब जीवन में कलह बढ़े, संवाद टूटे और शांति खो जाए,तो एक बार कलकलेश्वर के द्वार अवश्य जाएँ।क्योंकि जहाँ शिव हैं, वहाँ समाधान है।जहाँ कलकलेश्वर हैं, वहाँ कलह नहीं टिकती।

जारी…अगली यात्रा

*डॉ नवीन आनंद जोशी*
*ई 100 /22 शिवाजी नगर भोपाल मध्य प्रदेश*
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*9425016620*

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