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मुंबई में रचनात्मक तकनीक की नई इबारत लिख रहा IICT

एआई, एवीजीसी, गेमिंग और डिजिटल मीडिया के जरिए युवाओं के लिए खुल रहे हैं भविष्य के नए क्षितिज

लोकसत्य | डॉ. नवीन आनंद जोशी

मुंबई। आने वाला समय केवल तकनीक का नहीं, बल्कि तकनीक और कल्पना के संगम का समय है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, एक्सटेंडेड रियलिटी और डिजिटल कंटेंट अब मनोरंजन की दुनिया तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे रोजगार, उद्यमिता और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के नए द्वार खोल रहे हैं।इसी बदलते परिदृश्य की एक झलक मुंबई के NFDC कैंपस में संचालित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT) में देखने को मिली।
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB), मध्य प्रदेश द्वारा आयोजित प्रेस टूर कार्यक्रम के अंतर्गत IICT की यात्रा का अवसर मिला। यह यात्रा महज एक संस्थान के भ्रमण तक सीमित नहीं थी, बल्कि बदलते भारत में रचनात्मकता, तकनीक और युवा प्रतिभा के मिलन से आकार ले रहे भविष्य को करीब से देखने और समझने का अनुभव थी।

IICT को देखकर सहज ही महसूस होता है कि शिक्षा की दुनिया अब पारंपरिक कक्षाओं और पाठ्यक्रमों की सीमाओं से बाहर निकलकर Creative Technology, Artificial Intelligence, Animation, Visual Effects, Gaming, Extended Reality और Digital Media जैसे नए क्षेत्रों की ओर तेजी से बढ़ रही है।
यात्रा के दौरान श्वेता वर्मा ने संस्थान की विभिन्न गतिविधियों, पाठ्यक्रमों, प्रयोगशालाओं, साझेदारियों और भविष्य की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उनके संवाद और प्रस्तुति ने IICT की कार्यप्रणाली और उसकी दूरगामी परिकल्पना को समझने का अवसर दिया।
तकनीक जब कल्पना से मिलती है…

IICT की सबसे बड़ी विशेषता यही दिखाई देती है कि यहां तकनीक को केवल रोजगार हासिल करने का माध्यम नहीं माना जा रहा, बल्कि उसे रचनात्मक अभिव्यक्ति, नवाचार और नए विचारों को आकार देने की शक्ति के रूप में देखा जा रहा है।संस्थान का उद्देश्य ऐसे युवाओं को तैयार करना है जो आने वाले समय में भारत की क्रिएटिव इकोनॉमी को नई दिशा दे सकें।संस्थान में वर्तमान में 330 से अधिक विद्यार्थी, 30 से अधिक Train-the-Trainer पहल और 15 से अधिक इन्क्यूबेशन गतिविधियां संचालित होने की जानकारी दी गई। इसके साथ ही भविष्य में फिल्म सिटी में स्थायी कैंपस विकसित करने की योजना, जिसे वर्ष 2028 के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में प्रस्तुत किया गया, IICT की दीर्घकालिक दृष्टि को रेखांकित करती है।
यह महज एक संस्थान का विस्तार नहीं, बल्कि भारत में रचनात्मक तकनीक की शिक्षा को व्यापक आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

दुनिया से जुड़ती एक नई कक्षा…

आज की शिक्षा की सबसे बड़ी जरूरत केवल ज्ञान नहीं, बल्कि ज्ञान को वास्तविक दुनिया से जोड़ना है। IICT इसी दिशा में आगे बढ़ता दिखाई देता है।
संस्थान के 50 से अधिक MoUs विभिन्न प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों एवं कंपनियों के साथ होने की जानकारी दी गई। इनमें Google, YouTube, Netflix, Microsoft, NVIDIA, Adobe, Meta, Wacom, JioStar और WPP Media जैसी कंपनियों के साथ साझेदारियां शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त University of York, Deakin University, Satyajit Ray Film & Television Institute, Film and Television Institute of India, Game Developer Association of India और Comic Con India जैसे संस्थानों के साथ सहयोग का उल्लेख भी किया गया।इन साझेदारियों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इससे विद्यार्थियों को केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित रहने के बजाय उद्योग की वास्तविक जरूरतों, तकनीकी बदलावों और वैश्विक स्तर की कार्यप्रणाली से जुड़ने का अवसर मिलता है।
छोटे शहरों के युवाओं तक पहुंचेगा क्रिएटिव टेक्नोलॉजी का संसार…

IICT की पहलों का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि रचनात्मक तकनीक की शिक्षा को बड़े शहरों तक सीमित न रखकर उसे व्यापक युवा आबादी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।Content Creator Labs के माध्यम से 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों तक AVG-XR और डिजिटल कंटेंट की शिक्षा पहुंचाने की योजना सामने आई।
वहीं AI Skills House के अंतर्गत Google, YouTube और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सहयोग से 15,000 से अधिक AI स्किल स्कॉलरशिप की पहल भी उल्लेखनीय है।
Netflix के सहयोग से 100 विद्यार्थियों को छह प्रोफेशनल कार्यक्रमों में 80 प्रतिशत तक आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने की योजना भी युवाओं के लिए नए अवसरों का संकेत देती है। इनमें दो एक-वर्षीय डिप्लोमा और चार छह-माह के सर्टिफिकेट कार्यक्रम शामिल हैं।
इन पहलों का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यही है कि आने वाले समय में छोटे शहरों, कस्बों और सामान्य सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाली प्रतिभाओं के लिए भी क्रिएटिव टेक्नोलॉजी की दुनिया में प्रवेश के रास्ते खुल सकते हैं।

रिसर्च से स्टार्टअप तक…

IICT केवल प्रशिक्षण देने वाला संस्थान बनकर नहीं रहना चाहता। यहां रिसर्च, प्रयोग और नवाचार को भी समान महत्व दिए जाने की तस्वीर सामने आती है।
Sony Research के साथ Motion Capture Research Pilot जैसी पहल इसका उदाहरण है। यह बताती है कि संस्थान विद्यार्थियों को केवल मौजूदा तकनीक सिखाने तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि उन्हें नई तकनीक के प्रयोग और विकास की प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है।
यही वह दृष्टिकोण है जो भविष्य के विद्यार्थी की भूमिका को बदल सकता है।

वह केवल नौकरी तलाशने वाला युवा नहीं होगा, बल्कि—क्रिएटर, डिजाइनर, गेम डेवलपर, एआई प्रोफेशनल, एनिमेटर, फिल्म एवं मीडिया टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ या अपना स्टार्टअप खड़ा करने वाला उद्यमी भी हो सकता है।

विद्यार्थियों की आंखों में दिखाई दिया भविष्य..

संस्थान की यात्रा के दौरान विद्यार्थियों से संवाद इस पूरे अनुभव का सबसे जीवंत हिस्सा रहा।उनके उत्साह, सीखने की जिज्ञासा और भविष्य को लेकर उनकी स्पष्ट सोच ने यह महसूस कराया कि नई पीढ़ी अब पारंपरिक करियर विकल्पों से आगे निकलकर तकनीक और रचनात्मकता के नए रास्तों पर कदम बढ़ा रही है।बातचीत से यह विश्वास भी मजबूत हुआ कि यदि युवाओं को आधुनिक तकनीक, विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, प्रयोग की स्वतंत्रता और उद्योग से जुड़ने के पर्याप्त अवसर मिलें, तो भारतीय प्रतिभा वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना सकती है।

शिक्षा से आगे—रोजगार और उद्यमिता की नई जमीन…

भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की पहल और सहयोग से विकसित IICT उस बदलते भारत की तस्वीर सामने रखता है, जहां ज्ञान के साथ कौशल, तकनीक के साथ रचनात्मकता और शिक्षा के साथ रोजगार एवं उद्यमिता को एक साथ जोड़ा जा रहा है।यह दृष्टि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया की अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है और क्रिएटिव इंडस्ट्री अब वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
IICT की परिकल्पना ऐसे भारत की ओर संकेत करती है, जहां युवा केवल तकनीक के उपभोक्ता न रहें, बल्कि नई तकनीक, नए विचार और नई कल्पनाओं के निर्माता बनें।

नई पीढ़ी के लिए नया रनवे…

मुंबई की इस यात्रा से लौटते हुए मन में एक बात देर तक ठहरती रही—
भविष्य अब केवल इंजीनियरिंग, मेडिकल या पारंपरिक पेशों की किताबों में नहीं लिखा जा रहा। भविष्य उन स्क्रीन पर भी लिखा जा रहा है, जहां कोई युवा अपनी कल्पना से एक नई दुनिया रच रहा है; उस गेम में भी, जिसे वह डिजाइन कर रहा है; उस फिल्म में भी, जिसके दृश्य वह तकनीक से गढ़ रहा है; और उस एआई टूल में भी, जिसे वह अपनी सोच से नया आकार दे रहा है।जेनरेशन-जी के सामने संभावनाओं का एक नया आकाश है। जरूरत है तो केवल उस आकाश को पहचानने, अपनी प्रतिभा को तराशने और सही दिशा में उड़ान भरने की।IICT उसी उड़ान के लिए एक नया रनवे तैयार करता दिखाई देता है।और शायद आने वाले भारत की सबसे बड़ी पहचान यही होगी—
जहां तकनीक केवल मशीन नहीं होगी,
कल्पना केवल सपना नहीं होगी,और युवा केवल भविष्य की उम्मीद नहीं होगा बल्कि वह स्वयं भविष्य का निर्माता होगा।

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