कैंसर से जंग में नई रणनीति : इलाज सस्ता करने से लेकर स्कूलों तक जागरूकता की दस्तक

मुंबई के टाटा मेमोरियल सेंटर की पहल—महानगर से बाहर पहुंचेगा किफायती कैंसर उपचार, बीमारी की रोकथाम में बच्चों को बनाया जाएगा संदेशवाहक
लोकसत्य/डॉ.नवीन आनंद जोशी
मुंबई। कैंसर के खिलाफ लड़ाई अब केवल अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित रखने की रणनीति नहीं है। इलाज के खर्च का बोझ कम करने, मरीजों को उनके घर के नजदीक उपचार उपलब्ध कराने और बीमारी के प्रति समाज की सोच बदलने की दिशा में टाटा मेमोरियल सेंटर एक व्यापक मॉडल पर काम कर रहा है। मुंबई से उठ रही यह पहल अब देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचने की तैयारी में है।
टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉ. सुयश कुलकर्णी के अनुसार आने वाले समय में कैंसर उपचार को अफोर्डेबल कॉस्ट पर उपलब्ध कराने का प्रयास मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा। नासिक घाटी, भुवनेश्वर और पंजाब सहित दूसरे क्षेत्रों में भी कैंसर मरीजों को कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि टाटा मेमोरियल का ‘Access to Affordable Cancer Care for One and All’ कार्यक्रम पहले ही जिला स्तर पर कैंसर की रोकथाम, स्क्रीनिंग और उपचार की क्षमता विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। यह परियोजना महाराष्ट्र के अलावा पंजाब, ओडिशा समेत कई राज्यों तक विस्तारित हो चुकी है।
अस्पताल के अधीक्षक विनीत सामंत ने बताया कि 1966 में टाटा मेमोरियल सेंटर के गठन के बाद से उपचार के साथ शोध और शिक्षा इसकी मूल कार्यधारा का हिस्सा रहे हैं। आज क्लीनिकल रिसर्च और जागरूकता पर भी समानांतर रूप से काम हो रहा है। लेकिन कैंसर की लड़ाई में सबसे बड़ी चुनौती तकनीक नहीं, बल्कि समय है। जानकारी के अभाव में अनेक लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य बीमारी समझकर टाल देते हैं। जब तक वे विशेषज्ञ अस्पताल पहुंचते हैं, बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। यही वह बिंदु है जहां टाटा की रणनीति इलाज से आगे बढ़कर early detection और prevention की ओर जाती दिखाई देती है।टाटा मेमोरियल की आधिकारिक परियोजना भी जिला स्तर पर प्रारंभिक पहचान, स्क्रीनिंग और रोकथाम को मजबूत करने तथा समुदाय में कैंसर और तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता पैदा करने को प्रमुख लक्ष्य मानती है।
बच्चे बनेंगे कैंसर जागरूकता के दूत
डॉ. शालिनी पिम्पले के अनुसार कैंसर की रोकथाम में समाज की आदतों और जीवनशैली में बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है। अनियमित दिनचर्या, लगातार तनाव, मोटापा और शराब जैसे कारक जोखिम को बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं।इसी सोच को घर-घर पहुंचाने के लिए अब 8 से 15 वर्ष की उम्र के स्कूली बच्चों को वीडियो के माध्यम से कैंसर के प्रमुख कारकों और बचाव की जानकारी देने की योजना है। तर्क सीधा है—बच्चा केवल सीखता नहीं, वह घर में सवाल भी पैदा करता है। परिवार में स्वास्थ्य को लेकर संवाद शुरू करने की क्षमता उसके पास होती है। इसीलिए बच्चों को जागरूकता की धुरी बनाने की यह पहल भविष्य की पीढ़ी को बीमारी से लड़ने के बजाय उससे बचने की संस्कृति सिखाने की कोशिश है।
डॉ. पिम्पले ने यह भी बताया कि आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और उनसे निर्मित औषधियों की कैंसर के संदर्भ में संभावित भूमिका पर काम चल रहा है और इसके परिणाम सामने आने की प्रतीक्षा है। ऐसे प्रयासों को वैज्ञानिक शोध और प्रमाण के आधार पर आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में किसी भी उपचार पद्धति की प्रभावशीलता का मूल्यांकन ठोस चिकित्सकीय प्रमाणों से ही किया जा सकता है।
टाटा मेमोरियल की दिशा अब केवल ‘बड़े अस्पताल में इलाज’ की नहीं, बल्कि जहां मरीज है, वहीं बेहतर कैंसर सेवा पहुंचाने की है। संस्था का किफायती कैंसर केयर कार्यक्रम इसी उद्देश्य से जिला स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण और कैंसर स्क्रीनिंग की क्षमता बढ़ाने पर जोर देता है। पंजाब में टाटा मेमोरियल से जुड़े केंद्रों में किफायती कैंसर उपचार की व्यवस्था पहले से संचालित है। इसी बदलती तस्वीर को करीब से समझने के लिए प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो, मध्य प्रदेश के दल ने टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल का दौरा किया। अस्पताल की व्यवस्था, उपचार, शोध और जन-जागरूकता के प्रयासों को समझने का यह अवसर इस बात की ओर संकेत करता है कि कैंसर के खिलाफ अगली बड़ी लड़ाई केवल ऑपरेशन थिएटर में नहीं, बल्कि स्कूल, परिवार, गांव और समाज के बीच लड़ी जाएगी ।सवाल अब यह नहीं कि कैंसर का इलाज कितना महंगा है; असली सवाल यह है कि मरीज इलाज तक कितनी जल्दी पहुंचता है। टाटा मेमोरियल की नई पहल इसी दूरी को कम करने की कोशिश है।



