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84 महादेवों में 15वें श्री इन्द्रद्युम्नेश्वर महादेव, जहाँ कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाता…

डॉ. नवीन आनंद जोशी
महाकाल की दिव्य नगरी उज्जयिनी केवल एक नगर नहीं, अपितु सनातन चेतना का सजीव तीर्थ है। इसी पुण्यभूमि पर 84 महादेवों की वह अनुपम शृंखला स्थित है, जो मानव को धर्म, कर्म और मोक्ष के पथ पर निरंतर आलोकित करती है। इन्हीं में 15वें स्थान पर प्रतिष्ठित हैं — श्री इन्द्रद्युम्नेश्वर महादेव, जो कर्म की अविनाशी सत्ता और निष्काम साधना की महिमा का जीवंत प्रमाण हैं।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, प्रतापी राजा इन्द्रद्युम्न अपने उत्कृष्ट सत्कर्मों के प्रभाव से स्वर्ग को प्राप्त हुए। किंतु जब पुण्य-संचय क्षीण हुआ, तब उन्हें पुनः मृत्युलोक में अवतरण करना पड़ा। यह घटना उन्हें यह बोध करा गई कि स्वर्ग भी स्थायी नहीं,और वैभव भी तब तक ही है,जब तक कर्म जीवित है।

शोकाकुल एवं आत्मबोध से जागृत राजा हिमालय की ओर अग्रसर हुए, जहाँ महामुनि मार्कण्डेय से उन्हें जीवन का परम रहस्य प्राप्त हुआ। ऋषिवर ने उन्हें महाकाल वन में स्थित कलकलेश्वर लिंग के समीप एक दिव्य शिवलिंग की आराधना का निर्देश दिया।भक्ति से वरदान तक की यात्रा राजा इन्द्रद्युम्न ने वहाँ अखंड तप और निष्काम भक्ति द्वारा भगवान शिव की उपासना की। उनकी साधना से प्रसन्न होकर देवता, गंधर्व, किन्नर, यक्ष और सिद्धगण स्तुति करने लगे। अंततः स्वयं भगवान महादेव प्रकट हुए और वरदान दिया“यह शिवलिंग तुम्हारे नाम से श्री इन्द्रद्युम्नेश्वर महादेव
के रूप में विख्यात होगा,
और तुम्हारी कीर्ति अक्षय होगी।”
भगवान शिव ने यह भी उद्घोष किया कि नाग, गंधर्व, किन्नर, यक्ष, राक्षस, असुर, विद्याधर, मानव और देवता सभी को उनके कर्मों का ही फल प्राप्त होता है।
पुण्य क्षीण होने पर कोई भी अपने वैभव को स्थायी नहीं रख सकता।
यह कथा केवल अतीत की गाथा नहीं, अपितु आज के युग का दर्पण है।हम देखते हैं कि—
पद और प्रतिष्ठा क्षणिक हैं,
धन और सत्ता परिवर्तनशील हैं,
परंतु सेवा, सत्य और निष्काम कर्म से अर्जित कीर्ति ही चिरस्थायी होती है।श्री इन्द्रद्युम्नेश्वर महादेव हमें यह सिखाते हैं कि—कर्म ही मनुष्य का वास्तविक आभूषण है,
और निष्काम भाव से किया गया कर्म ही मोक्ष का सेतु बनता है।
मान्यता है कि श्री इन्द्रद्युम्नेश्वर महादेव के दर्शन से भक्त को—
स्थिर कीर्ति,शुद्ध विवेक,कर्मबोध और आत्मबल का आशीर्वाद प्राप्त होता है।यह तीर्थ हमें स्मरण कराता है कि कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाता वह या तो हमें उठाता है, या हमें सिखाता है।

हर हर महादेव….
क्रमशः श्रृंखला जारी
*डॉ.नवीन आनंद जोशी*
*ई 100/22, शिवाजी नगर* भोपाल मप्र 9425018708
9425016620*

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